कौशल शिक्षा
केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में कौशल शिक्षा
कौशल शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल, व्यवसायिक दक्षता और रोजगारोन्मुखी क्षमताओं से भी सशक्त बनाना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और CBSE के कौशल शिक्षा ढांचे के अनुरूप है।
कौशल शिक्षा की प्रमुख विशेषताएँ (KVS में)
1. उद्देश्य
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छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना और 21वीं सदी के कौशल (समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, डिजिटल साक्षरता) विकसित करना।
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हैंड्स-ऑन लर्निंग के माध्यम से वास्तविक जीवन और कार्यस्थल से शिक्षा को जोड़ना।
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छात्रों को व्यवसाय, उद्यमिता या उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना।
2. संरचना
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माध्यमिक स्तर (कक्षा VI–VIII):
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कार्य शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बुनियादी कोडिंग/रोबोटिक्स गतिविधियों के माध्यम से पूर्व-व्यावसायिक exposure।
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माध्यमिक स्तर (कक्षा IX–X):
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छात्र कौशल विषय को अतिरिक्त (छठा) विषय के रूप में ले सकते हैं।
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प्रचलित विकल्प – सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कोड 417), रिटेल, पर्यटन, ब्यूटी एंड वेलनेस, कृषि, मल्टीमीडिया, स्वास्थ्य सेवा।
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सीनियर सेकेंडरी स्तर (कक्षा XI–XII):
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व्यावसायिक पाठ्यक्रम वैकल्पिक विषयों के रूप में (CBSE के अनुसार)।
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प्रमुख क्षेत्र – वित्तीय बाजार, वेब एप्लिकेशन, हेल्थ केयर, पर्यटन, IT और AI।
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3. शिक्षण–अधिगम पद्धति
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प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण: विद्यार्थी वास्तविक जीवन से जुड़े प्रोजेक्ट पूरा करते हैं।
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उद्योग से जुड़ाव: गेस्ट लेक्चर, कार्यशाला और इंडस्ट्री विजिट।
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डिजिटल प्लेटफार्म: ई-लर्निंग टूल, कोडिंग प्लेटफार्म और AI लैब का उपयोग।
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मूल्यांकन: व्यावहारिक (50%) और सैद्धांतिक (50%), जिसमें रटने की बजाय कौशल पर जोर।
4. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) से सामंजस्य
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कौशल शिक्षा का पाठ्यक्रम बहुविषयक शिक्षण और लचीले विकल्पों पर आधारित।
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उद्यमिता, इंटर्नशिप और अनुभवात्मक अधिगम पर विशेष बल।
5. छात्रों के लिए लाभ
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रोजगार क्षमता और कैरियर तैयारी में वृद्धि।
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नवाचार, स्टार्ट-अप संस्कृति और समस्या समाधान क्षमता का विकास।
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व्यावसायिक/तकनीकी शिक्षा के उच्च अध्ययन के लिए मजबूत आधार।
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आत्मनिर्भर भारत पहल को सहयोग।